आतंकवाद, महामारी और जलवायु परिवर्तन बहुपक्षवाद के सामने असल चुनौतियां: डॉ एस जयशंकर

August 28, 2020

S Jaishanar

टेरी के 19 वें दरबारी सेठ मेमोरियल लेक्चर में बोलते हुए, भारत के विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर और संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने जलवायु कार्रवाई और सतत विकास के लिए वैश्विक सहयोग के अवसरों के बारे में बात की।

नई दिल्ली, अगस्त 28, 2020: सार्वजनिक नीति की चुनौतियों में स्थानीय, राष्ट्रीय और वैश्विक मुद्दों के अन्तर्सम्बन्धों पर बोलते हुए, डॉ एस जयशंकर ने 'स्थानीय के मूल्य और महत्व' को पहचानने पर ज़ोर दिया। भारत के विदेश मंत्री ने कहा, "वोकल फॉर लोकल" वास्तव में, एक ऐसा संदेश है, जिसकी गूँज हम सभी की कल्पना से कहीं अधिक बड़ी है। सही मायने में स्थानीय सोच है जो यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेगी कि शासन और विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।"

मंत्री ने कहा कि भारत को अधिक आत्मनिर्भर होने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि वैश्विक महामारी के इस समय में, भारत रोजगार सृजन, नवाचार और डिजिटलीकरण को प्रधानता देकर अवसर पैदा करेगा। पीएम मोदी के हालिया संदेश को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि सरकार का ज़ोर न सिर्फ़ मेक इन इंडिया पर है बल्कि वह इसका लाभ दुनिया तक पहुँचाना चाहती है।

मंत्री ने वैश्वीकरण की अवधारणा को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया । उन्होंने कहा कि इसे कुछ लोगों के हितों द्वारा परिभाषित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है, जो मौटे तौर पर इस प्रक्रिया को वित्तीय, व्यापार और यात्रा के परिप्रेक्ष्य में देखते हैं। "हमारे सामने आतंकवाद, महामारी और जलवायु परिवर्तन जैसी असल चुनौतियां हैं। ये ऐसे मुद्दे हैं जो वास्तव में बहुपक्षवाद की गंभीरता का परीक्षण करेंगे। "

बहुपक्षवाद के लिए एक नए, समावेशी और गैर-लेन-देन वाले दृष्टिकोण का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा, "हमें अंतर्राष्ट्रीय प्रणाली को आधुनिक बनाने की जरूरत है, क्रमशः आगे बढ़ना होगा, प्रत्येक इकाई को इस दौर के लिए प्रासंगिक बनाना होगा जिसमें हम रहते हैं न कि जब इसे बनाया गया था। इसके लिए सदस्यता और नियंत्रण की संरचनाओं को फिर से देखना ज़रूरी है, परिचालन सिद्धांतों और नियमों को फिर से उन्मुख करना और बहुपक्षीयता के प्रमुख स्तंभों के आउटसोर्सिंग चैनलों का पुनर्निर्माण करना आवश्यक है। "

भारत की हरित ऊर्जा परिवर्तनों में उपलब्धियों को उजागर करते हुए, उन्होंने भारत के महत्वाकांक्षी नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य, एलईडी कार्यक्रम, इलेक्ट्रिक व्हीकल सहित बेहतर शहरी परिवहन समाधान, वन कवर में वृद्धि, 2030 तक के 26 मिलियन हेक्टेयर भूमि क्षेत्र को पुनर्जीवित करने की प्रतिबद्धता और ग्रामीण घरों में पानी की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए हर घर जल जैसे योजना को सूचीबद्ध किया। उन्होंने जलवायु परिवर्तन कार्यों में भारत की वैश्विक साझेदारी जैसे कि इंटरनेशनल सोलर अलायन्स और दी कोएलिशन फॉर डिज़ास्टर रेसिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर (CDRI) पर भी ज़ोर दिया। सीडीआरआई के बारे में बोलते हुए, उन्होंने कहा, भारत बुनियादी ढांचे - परिवहन, संचार, इमारतों में एक सहकारी दृष्टिकोण को आगे बढ़ाना चाहता है, खासकर उन क्षेत्रों में जो प्राकृतिक आपदाओं से ज़्यादा प्रभावित हैं।"

उन्होंने कहा, "भारत 2021 में एक निर्वाचित सदस्य के रूप में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में प्रवेश करेगा और लगभग उसी समय G20 के ट्रोइका में शामिल होगा। जो बहुपक्षवाद के लाभों को पहचानते हैं और इसके सुधार में अधिक योगदान देने के लिए तैयार हैं, उन सभी के साथ काम करने का इससे बेहतर अवसर नहीं हो सकता है।"

संयुक्त राष्ट्र महासचिव श्री एंटोनियो गुटेरेस ने मेमोरियल लेक्चर में 'दी राइज ऑफ़ रेन्यूवेबल्स: शाइनिंग ए लाइट ऑन ए सस्टेनेबल फ्यूचर’ पर अपने संबोधन में कहा, " जैसा कि दरबारी सेठ ने परिकल्पना की थी भारत के पास देश और विदेश में उस नेतृत्व को आगे बढ़ाने के लिए सभी साधन हैं। उन्होंने कहा कि गरीबी उन्मूलन और सार्वभौमिक ऊर्जा उपलब्धता - भारत की दो सर्वोच्च प्राथमिकताएं है। उन्होंने कहा, "स्वच्छ ऊर्जा, विशेष रूप से सौर को बढ़ावा देना, दोनों को हल करने का तरीका है। महामारी से उबरने के दौरान नवीकरणीय ऊर्जा, स्वच्छ परिवहन और ऊर्जा दक्षता में निवेश से दुनिया भर में 270 मिलियन लोगों तक बिजली पहुंच बढ़ सकती है – यानी दुनिया के वे एक तिहाई लोग जो इससे वंचित हैं। उन्होंने इस बात पर ज़ोर देते हुए कहा, "इस तरह के समान निवेश अगले तीन वर्षों में सालाना 9 मिलियन नौकरियां बनाने में मदद कर सकते हैं। नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश, प्रदूषण फ़ैलाने वाले जीवाश्म ईंधन में निवेश करने की तुलना में तीन गुना अधिक रोज़गार उत्पन्न करता है।"

यह कहते हुए कि भारत पहले से ही इस दिशा में आगे बढ़ रहा है, उन्होंने कहा कि "2015 के बाद से, भारत में अक्षय ऊर्जा में काम करने वाले लोगों की संख्या में पाँच गुना वृद्धि हुई है। पिछले साल, भारत में कोयला आधारित बिजली के मुकाबले, सौर ऊर्जा पर अधिक खर्च किया गया। "

हालाँकि उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि "G20 रिकवरी पैकेज में स्वच्छ ऊर्जा के मुकाबले, जीवश्म ईंधन पर दोगुना पैसा खर्च किया गया है। उन्होंने कहा, "जीवाश्म ईंधन में निवेश का अर्थ है अधिक मृत्यु और बीमारी और बढ़ती स्वास्थ्य लागत। "

उन्होंने छह "जलवायु-सकारात्मक कार्यों" को सूचीबद्ध किया, उन्होंने सुझाव दिया कि सरकारों को इन्हें अपनाना चाहिए ताकि महामारी से बेहतर तरीके से उबरने में मदद मिले। ये हैं -

  • हरित नौकरियों में निवेश करें।
  • प्रदूषणकारी उद्योगों की सहायता न करें।
  • जीवाश्म-ईंधन सब्सिडी को ख़त्म करें।
  • सभी वित्तीय और नीतिगत निर्णयों में जलवायु जोखिम को ध्यान में रखें।
  • एक साथ काम करें।
  • सबसे महत्वपूर्ण, कोई पीछे न छूटे।

टेरी के महानिदेशक डॉ अजय माथुर ने कोयला इस्तेमाल न करने की महासचिव की बात पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि आज भारत में सौर ऊर्जा सबसे सस्ती बिजली है, लेकिन केवल तभी जब सूर्य चमकता है। उन्होंने कहा, "अल्पावधि में, कोयला और नवीकरणीय बिजली दोनों ही उन लाखों भारतीयों की जरूरतों को पूरा करती रहेंगी जिन्होंने पिछले कुछ वर्षों में बिजली पायी है, और जो बिजली भुगतान करने की क्षमता रखते हैं। अगर राउंड-द-क्लॉक अक्षय बिजली की लागत, कोयला आधारित बिजली की तुलना में सस्ती हो जाती है, जो अगले कुछ वर्षों में होने की उम्मीद है, तो यह स्थिति बदल सकती है।"

टेरी के बारे में

द एनर्जी एंड रिसोर्स इंस्टीट्यूट यानि टेरी एक स्वतंत्र, बहुआयामी संगठन है जो शोध, नीति, परामर्श और क्रियान्वयन में सक्षम है। संगठन ने लगभग बीते चार दशकों से भी अधिक समय से ऊर्जा, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में संवाद शुरू करने और ठोस कदम उठाने का कार्य किया है।

संस्थान के शोध और शोध-आधारित समाधानों से उद्योगों और समुदायों पर परिवर्तनकारी असर पड़ा है। संस्थान का मुख्यालय नई दिल्ली में है और गुरुग्राम, बेंगलुरु, गुवाहाटी, मुंबई, पणजी और नैनीताल में इसके स्थानीय केंद्र और परिसर हैं जिसमें वैज्ञानिकों, समाजशास्त्रियों, अर्थशास्त्रियों और इंजीनियरों की एक बहु अनुशासनात्मक टीम कार्यरत है।

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