TERI हिंदी

हाथियों के डर से बेख़ौफ़ हुए असम के गाँव: सोलर ने दी आज़ादी

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October 8, 2020

सौर स्ट्रीट लाइट से असम के गाँव में रहने वाले इन लोगों की ज़िंदगी में बदलाव आए हैं। गाँव में नई दुकानें खुल गयी हैं। जिससे लोगों को रोज़गार के अवसर भी मिले हैं। महिलाएं सुरक्षित महसूस करती हैं।

भारत के जलवायु संबंधी लक्ष्य: तकनीकी समाधान और बाधाएं

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September 10, 2020

द नॉर्वेजियन मिनिस्ट्री ऑफ फॉरेन अफेयर्स (एमएफए) और द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (TERI) के बीच फ्रेमवर्क एग्रीमेंट (एनएफए) के तहत, जलवायु परिवर्तन के समाधान ढूंढने के लिए, भारत के प्रासंगिक एनर्जी-इंटेसिव सेक्टर के लिए एक व्यापक शोध अध्ययन के बाद डेटाबेस विकसित किया गया है।

आतंकवाद, महामारी और जलवायु परिवर्तन बहुपक्षवाद के सामने असल चुनौतियां: डॉ एस जयशंकर

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August 28, 2020

टेरी के 19 वें दरबारी सेठ मेमोरियल लेक्चर में बोलते हुए, भारत के विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर और संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने जलवायु कार्रवाई और सतत विकास के लिए वैश्विक सहयोग के अवसरों के बारे में बात की।

रात के अँधेरे में हमारे घर सोलर से चमकते हैं

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August 26, 2020

बिजली का गायब हो जाना, देश के गाँव और शहरों की कई जगहों का अँधेरे में डूब जाना आम है। कई जगहों पर सिर्फ़ 6 से 7 घंटे ही बिजली रहती है। कुछ लोगों ने इस समस्या से निपटने के लिए सौर ऊर्जा का सहारा लिया। देखिए एक ऐसी कॉलोनी की कहानी जहाँ लोगों ने सोलर प्लांट को अपना कर बिजली की समस्या को दूर किया।

नौकरियों और स्थायी आजीविका को पुनर्जीवित करने के लिए टेरी द्वारा प्रस्तावित ग्रीन स्टिमुलस

Press Release |
August 25, 2020

यह परिचर्चा पत्र उन छह क्षेत्रों पर ध्यान आकर्षित करता है जो अक्षय ऊर्जा के विकास में तेज़ी और हवा की गुणवत्ता में सुधार ला सकते हैं।

नई दिल्ली, 24 अगस्त 2020: द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (टीईआरआई) ने भारतीय अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए 'ए फिस्कली रिस्पॉन्सिबल ग्रीन स्टिमुलस' नामक एक परिचर्चा पत्र जारी किया, जिसमें न्यूनतम सरकारी खर्च से रोज़गार और मांग पैदा की जा सकती है।

पानी की होगी कमी: वर्षा जल संचयन को बनाना होगा एक जन आंदोलन

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August 18, 2020

जल संसाधन सीमित और दुर्लभ हैं। पानी घट रहा है और साल 2050 तक यह कमी एक बड़ा संकट बन सकती है। ऐसे में हमें वर्षा जल संचयन जैसे जल संरक्षण के स्थायी तरीकों को अपनाना चाहिए। वर्षा जल संरक्षण न सिर्फ मैदानी बल्कि पहाड़ी इलाकों के लिए भी ज़रूरी है।

झारखण्ड: क्वारंटाइन लोगों की ज़िंदगी सोलर से चमकी

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August 17, 2020

लॉकडाउन के बाद दूसरे राज्यों से अपने घर लौटने वाले लोगों के लिए क्वारंटाइन सेंटर्स की कमी एक समस्या बन गयी थी। इस समस्या को देखते हुए प्रशासन ने विद्यालयों को भी क्वारंटाइन सेंटर्स में बदलने का फैसला किया। झारखण्ड के सोलर स्कूलों में रहने वाले प्रवासियों के लिए सोलर प्लांट एक बड़ी सुविधा है अगर यहाँ पर ये सुविधा नहीं होती तो यह जगह लोगों के लिए जेल के समान होती।

सोलर से चमके झारखण्ड के स्कूल: लालटेन और दिए से मिली छुट्टी

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August 5, 2020

जगमग पाठशाला परियोजना के अंतर्गत गुमला के बिशुनपुर प्रखंड में कुल 12 विद्यालयों में सोलर पावर प्लांट की स्थापना की गयी। विद्यालयों में स्थापित इन पावर प्लांट्स में इतनी क्षमता है कि विद्यालय की सभी कक्षाओं, कार्यालयों, शौचालय एवं रसोई घर में पर्याप्त रौशनी की सुविधा होती है।

प्लास्टिक कूड़े के ढेर बन रहे हैं हमारे समुद्र: मिलकर उठाने होंगे कदम

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July 28, 2020

महासागर सबसे बड़े डंपिंग ग्राउंड बन रहे हैं जिसमें हर साल एक मिलियन टन प्लास्टिक कूड़ा पहुँच रहा है। महासागरों में मौजूद लगभग 80 फीसदी कूड़ा, प्लास्टिक का कूड़ा है। इससे समुद्री आबादी जोखिम में है। प्लास्टिक कचरे का उचित प्रबंधन कर इसे रोका जा सकता है।

कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर: कोविड 19 महामारी में गरीबों को खाद्य सुरक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं के लिए ज़रूरी

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July 24, 2020

विकासशील देशों में बड़े स्तर पर खाद्यान उत्पादन के बावजूद बहुत सारा खाद्यान सप्लाई चेन में ही नष्ट हो जाता है। इसका एक बड़ा कारण अच्छे कोल्ड चेन ढाँचे की कमी माना जाता है।