झारखण्ड: क्वारंटाइन लोगों की ज़िंदगी सोलर से चमकी

17 Aug 2020

लॉकडाउन के बाद दूसरे राज्यों से अपने घर लौटने वाले लोगों के लिए क्वारंटाइन सेंटर्स की कमी एक समस्या बन गयी थी। इस समस्या को देखते हुए प्रशासन ने विद्यालयों को भी क्वारंटाइन सेंटर्स में बदलने का फैसला किया। झारखण्ड के सोलर स्कूलों में रहने वाले प्रवासियों के लिए सोलर प्लांट एक बड़ी सुविधा है अगर यहाँ पर ये सुविधा नहीं होती तो यह जगह लोगों के लिए जेल के समान होती।

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कोविड -19 जैसी वैश्विक महामारी का प्रकोप पूरी दुनिया पर पड़ा। कोविड के संक्रमण को रोकने के लिए भारत सरकार ने पूरे देश में सम्पूर्ण लॉकडाउन करने का निर्णय लिया हालाँकि सरकार अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए चरणों में इस लॉकडाउन को अनलॉक कर रही है। साथी ही सोशल डिस्टेंसिंग जैसे तरीके अपनाने पर ज़ोर दिया जा रहा है।

लॉकडाउन की घोषणा के साथ ही दूसरे राज्यों में रहने वाले लोग अपने अपने घर लौटने लगे। बड़ी संख्या में अपने राज्यों और क्षेत्रों में लौटे प्रवासियों के लिए क्वारंटाइन सेंटर्स की कमी एक बड़ी समस्या बन गयी थी और इस समस्या को देखते हुए प्रशासन ने विद्यालयों को भी क्वारंटाइन सेंटर्स में बदलने का फैसला किया। झारखंड के गुमला जिले के बिशुनपुर में इन प्रवासियों के लिए चयनित विद्यालयों में रहने की व्यवस्था की गयी।

प्रखंड विकाश पदाधिकारी द्वारा क्वारंटाइन सेंटर के लिए बिशुनपुर प्रखंड के अन्य स्थलों के साथ साथ उन सभी विद्यालयों का चयन किया गया जहाँ सोलर पॉवर प्लांट की स्थापना TERI-Signify द्वारा की गयी थी परन्तु मुख्य रूप से 5 सेंटरों का इस्तेमाल प्रवासी लोगों को ठहराने के लिए किया गया था जिसमें 3 में अभी भी प्रवासी ठहरे हुए हैं। यानी सोलर से जगमगाने वाले स्कूल अब लोगों के क्वारंटाइन सेंटर बन गए हैं।

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ये सोलर पावर प्लांट जगमग पाठशाला परियोजना के अंतर्गत गुमला के बिशुनपुर प्रखंड में कुल 12 विद्यालयों में स्थापित किए गए। विद्यालयों में स्थापित इन पावर प्लांट्स में इतनी क्षमता है कि विद्यालय की सभी कक्षाओं, कार्यालयों, शौचालय एवं रसोई घर में पर्याप्त रौशनी की सुविधा होती है।

यह परियोजना; Signify Innovations India Limited (पहले फिलिप्स लाइटिंग इंडिया लिमिटेड के नाम से जाना जाता था) द्वारा वित्त प्रदत है। टेरी (द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टिट्यूट) इस परियोजना को अपने टेक्निकल और फील्ड अनुभव के आधार पर लागू कर रही है। टेरी संस्था ने विद्यालयों की ज़रूरत के हिसाब से पावर प्लांट्स की स्थापना की। विद्यालयों में स्थापित इन पावर प्लांट्स में इतनी क्षमता है कि विद्यालय की सभी कक्षाओं, कार्यालयों, शौचालय एवं रसोई घर में पर्याप्त रौशनी की सुविधा होती है।

इस प्रोजेक्ट के तहत गुमला के बिशुनपुर प्रखंड में कुल 12 विद्यालयों का चयन कर प्रत्येक में 2 से 3 किलोवाट क्षमता वाले सोलर पॉवर प्लांट की स्थापना जनवरी-फरवरी माह 2019 में की गई।

राजकीय मध्य विद्यालय, बिशुनपुर सेंटर के प्रभारी जीतन महली कहते हैं कि यहाँ पर फरवरी माह से ही व्यवस्था की हुई है। और अभी तक जारी है। इस दौरान कुल 196 पुरुष प्रवासी यहाँ पर ठहराए गए जो देश के अन्य राज्यों से आए हैं जिसमें दिल्ली और गुजरात से आने वालों की संख्या ज़्यादा रही है। उन्होंने बताया कि लोगों को इस सोलर प्लांट से बहुत सुविधा मिली है, देर शाम तक वे लोग जागते हुए कुछ पढ़ाई या खेल जैसे लूडो, कैरम, चेस का आनंद उठाते हैं, यहाँ पर टीवी की भी सुविधा है वे जब चाहें देख सकते है, मोबाइल चार्जिंग की व्यवस्था होने से, वे अपने घर परिवार से जुड़े हुए हैं।

प्राथमिक विद्यालय सिंग्दयी में 1 जून तक 139 पुरुष प्रवासी ठहराए गए और सभी अपना निर्धारित समय व्यतीत कर अपने घर चले गए।

जत्राताना भगत विद्या मंदिर, बिशुनपुर में 80 प्रवासी मज़दूर ठहराए गए जो 24 जून 2020 तक चले गए। सेंटर प्रभारी श्री राकेश कुमार शर्मा जी कहते हैं कि "सोलर प्लांट अगर यहाँ पर नहीं होता तो यह जगह लोगों के लिए जेल के समान होती। ऐसे में यहाँ टीवी, मोबाइल के अलावा लोग देर शाम तक मैदान में घूमते थे। निर्वाध बिजली रहने से उन लोगों को कभी रौशनी की कमी नहीं खली।"

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राजकीय कन्या मध्य विद्यालय, बिशुनपुर में शुरुआत से अभी तक सेंटर चालू है। इस दौरान कुल 125 महिला प्रवासी ठहराई गयी। वर्तमान में 8 महिला प्रवासी ठहरी हुई हैं। यहाँ पर 2 गार्ड की ड्यूटी लगायी हुई है। जिसमें एक गार्ड श्री मुकेश उरांव का कहना है कि लोग दूर प्रान्तों से आएं और अपने घर के नज़दीक आकर भी घर नहीं जा पाए परन्तु यहाँ की व्यवस्था खासकर लाइट, मोबाइल चार्जिंग और टीवी की व्यवस्था इन महिलाओं को अपनों से जोड़े हुए है। इनके लिए सुबह से रात के खाने तक की समुचित व्यवस्था की गयी है साथ ही इनके मनोरंजन के साधनों का इंतजाम किया गया है जैसे: लूडो, कैरम, चेस इत्यादि।

क्वारंटाइन सेंटर में बदले इन स्कूलों पर जगमग पाठशाला परियोजना प्रभारी मनीष कुमार पांडेय कहते हैं कि, "जगमग पाठशाला परियोजना का प्रमुख उद्देश्य स्कूली बच्चों को शिक्षा के लिए सही वातावरण और सुविधाएं प्रदान करना है। इस परियोजना से जुड़े हुए स्कूलों में विद्यार्थियों की अटेंडेंस और पढ़ाई में काफी सुधार आया है। अब ऐसे समय में जब कोविड जैसी महामारी से पूरी दुनिया प्रभावित है और सोलर इंफ्रास्ट्रक्चर का लाभ यदि स्थानीय लोगों के लिए हो रहा है तो ये अच्छी बात है। स्कूल में जब भी ऊर्जा की ज़रूरत होती है वो इस परियोजना द्वारा लगाए गए इंफ्रास्ट्रक्टर से आसानी से पूरा किया जा सकता है और दूर दूर से आए हुए लोग इसका लाभ ले सकते हैं।"

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