पिघलता हिमालय, बहती बिजली


क्या हम ऐसे भविष्य की तरफ़ बढ़ रहे हैं जहाँ पानी की किल्लत होगी? जन-जीवन प्रभावित होगा और हमारे घरों में अँधियारा होगा? जानिए टेरी के ग्लेशियर अनुसंधान कार्यक्रम के तहत किया गया कार्य इस वीडियो के ज़रिए।


हिमालयी नदियां भारत के लोगों के लिए जीवन रेखा है। इन नदियों से न सिर्फ कृषि उन्नत होती है बल्कि हमारे घरों के बल्ब भी जलते हैं। देश में कुल बिजली उत्पादन का 83% पानी के उपयोग पर आधारित है लेकिन हिमालयी नदियां जिन ग्लेशियरों से बनती हैं वे पिघल रहे हैं। अभी इन ग्लेशियरों के पिघलने से नदियों में पानी बढ़ेगा लेकिन आने वाले वक़्त में कम हो जाएगा। क्या हम ऐसे भविष्य की तरफ़ बढ़ रहे हैं जहाँ पानी की किल्लत होगी? जन-जीवन प्रभावित होगा और हमारे घरों में अँधियारा होगा? पढ़िए टेरी (द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टिट्यूट) के ग्लेशियर अनुसंधान कार्यक्रम के तहत तैयार किया गया यह शोध पत्र: https://bit.ly/2K4AQxP

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