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स्थिरता और लाभप्रदता के लिए भारतीय कृषि को कुशल बनाना

10 Jan 2022

भारत को खाद्य और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ साथ अपने विविध कृषि क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों के कुशल उपयोग और भूमि उपयोग प्रणालियों की स्थिरता सुनिश्चित करना भी ज़रूरी है। इसे प्राप्त करने का अर्थ होगा नवाचार, विविधीकरण, व्यावसायीकरण, स्थिरता और मूल्य श्रृंखला में वृद्धि की दक्षता को आगे बढ़ाने के लिए क्षमताओं और कौशल का निर्माण करना।

कृषि क्षेत्र में ट्रांजीशन - भारत में वर्षा आधारित खेती की संभावना

23 Dec 2021

फसल उत्पादकता बढ़ाने के अलावा, वर्षा सिंचित क्षेत्र के विकास की रणनीति को कृषि परिवर्तन और आर्थिक विकास के लिए आधुनिक उपकरणों का उपयोग करके गरीबों को अपनी क्षमताओं, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का निर्माण करने के लिए सशक्त बनाने के साथ और अधिक करना होगा। उपयुक्त प्रौद्योगिकी इन क्षेत्रों में सतत खाद्य सुरक्षा और गरीबी उन्मूलन की कुंजी है

भारत में रेशम उद्योग: इंडियन क्वीन ऑफ़ टेक्सटाइल्स की चमक की कहानी

20 Dec 2021 | Ms Lata Vishwanath

इस लेख में, लता विश्वनाथ भारत में रेशम उत्पादन के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करती हैं। इस उद्योग ने विभिन्न मंत्रालयों के आपसी सहयोग से धन प्राप्त किया है और किसानों को स्थायी आजीविका दी है, विशेष रूप से झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और बिहार राज्यों में हाशिए के समुदायों की महिलाओं को रोजगार देकर उन्हें स्थायी आजीविका दी है। वह यह भी कहती हैं कि भारत सरकार का पूर्वोत्तर राज्यों में रेशम उद्योग के विकास पर विशेष ध्यान है।

Silk Industry in India: The Story Behind the Sheen of the Indian Queen of Textiles

13 Dec 2021 | Ms Lata Vishwanath

In this article, Lata Vishwanath discusses different aspects of silk production in India. The industry which has received funding from the convergence of various ministries has given sustainable livelihood to farmers, in particular to women of marginalized communities in the states of Jharkhand, Odisha, West Bengal, Chhattisgarh, Maharashtra, Andhra Pradesh, and Bihar by giving them jobs. She also says the Government of India has a special focus on the development of the silk industry in the Northeast States.

प्राकृतिक खेती: बढ़ती आमदनी और खुशहाल किसान

29 Oct 2021 | Mr Rohit Prashar

उत्पादन और मूल्य प्राप्ति दोनों में अनिश्चितता की वजह से किसान उच्च लागत वाली कृषि के दुष्चक्र में फंस गया है। लगातार गिरता उत्पादन और बढ़ती बीमारियां कृषि क्षेत्र की जटिलताओं को और बढ़ा रही हैं। इस परिस्थिति से किसानों को निकालने और उनके दीर्घकालिक कल्याण के लिए प्राकृतिक खेती की तरफ रुख करने के सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं

पराली प्रदूषण - सटीक नीति से होगा हल

07 Oct 2021

- उपयुक्त कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा देकर धान की अंधाधुंध खेती पर लगाम लगाई जा सकती है - धान की ऐसी प्रजातियों को प्रोत्साहित करें जो समय और पानी दोनों कम लेती हैं - ऐसी कंबाइन हार्वेस्टर मशीनें विकसित की जाएं जो धान निकालते वक्त पराली भी खेत से हटा लें तो पराली किसानों के लिए अतिरिक्त आय का साधन हो सकता है

अपशिष्ट जल किसानों के लिए बन सकता है संसाधन

08 Jul 2021

किसान उपलब्ध मीठे पानी के संसाधनों का अति उपयोग नहीं करना चाहते, वे भूजल का संरक्षण करना चाहते हैं। सीवेज का पानी आसानी से उपलब्ध है लेकिन बुनियादी ढांचे और उचित उपचार की कमी के कारण, आंशिक रूप से उपचारित नगरपालिका अपशिष्ट जल और अनुपचारित सीवेज ने समय के साथ मिट्टी की गुणवत्ता, दूषित भूजल और फसल की उपज को कम कर दिया है।

Farmers Shift to Climate-resilient Crop: With Rising Cyclones in Tamil Nadu

13 Jan 2021 | Ms Sharada Balasubramanian

In the recent past, the Bay of Bengal has witnessed frequent cyclones. In 2011, when Cyclone Thane struck the coasts of Cuddalore in Tamil Nadu, many farmers looked for a crop that could withstand climatic fluctuations. Sharada Balasubramanian says vetiver (Chrysopogon zizanioides)—a hardy grass—was found to be a suitable alternative to cashew and casuarina, which were often getting toppled by cyclone. Farmers found this not just climate-resilient, but also profitable from an income perspective.

The impact of stubble burning and poor air quality in India during the time of COVID-19

27 Jul 2020 | Ms Rita Pandey| | Ms Anuja Malhotra

A holistic approach by government and farmers alike is needed to address the problem of burning crop stubble, which comes at a huge environmental and health cost

कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर: कोविड 19 महामारी में गरीबों को खाद्य सुरक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं के लिए ज़रूरी

24 Jul 2020 | Mr Gaurav Phore

विकासशील देशों में बड़े स्तर पर खाद्यान उत्पादन के बावजूद बहुत सारा खाद्यान सप्लाई चेन में ही नष्ट हो जाता है। इसका एक बड़ा कारण अच्छे कोल्ड चेन ढाँचे की कमी माना जाता है।