बनारस में कूड़े के नज़ारे, नगर निगम और लोगों को मिलकर मिटाने होंगे

31 Dec 2019

Banaras story

गंगा नदी के तट पर बसा वाराणसी भारत और विश्व की आध्यत्मिक जगहों में से एक है। यह सालों से पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है लेकिन तेज़ी से शहरीकरण की ओर बढ़ रहे वाराणसी और इसकी जनसँख्या विस्फोट के कारण यहाँ ठोस कचरे के ढेर भी बढ़ रहे हैं जिसका निपटारा करना वाराणसी म्युनिसिपल कारपोरेशन के कन्धों पर है। कई खत्ता घरों पर सुबह से लेकर शाम तक जमा होते कचरे के ढेर देखे जा सकते हैं। इसके अलावा शहर में बढ़ते कचरे के अवैध डंपिंग पॉइंट्स की समस्या भी बढ़ रही है। सड़कों, नालियों, खुली जगहों पर बढ़ रहे कचरे के ये ढेर इस शहर के लिए दाग की तरह हैं। कुल 12,92,718 (2018 ) जनसँख्या वाले वाराणसी में साल 2018 में लगभग 750 टीपीडी कचरा उत्पन्न हुआ । इसमें से 77% कचरे को इकठ्ठा किया गया और 23% बचा हुआ कचरा खाली पड़े प्लॉट्स में, नदी नाले और म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन की साइट्स पर पड़ा रहा। वाराणसी शहर के सॉलिड वेस्ट का प्रबंधन वाराणसी म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन द्वारा किया जा रहा है। ऐसा अनुमान है कि नगर निगम प्रत्येक वर्ष अपने कुल बजट का 31% सॉलिड वेस्ट के प्रबंधन पर खर्च करती है इसके बावजूद शहर साफ़ नज़र नहीं आता।

कूड़े के ढेर धरती का तापमान बढ़ा रहे हैं

कचरे के ये ढेर हमारी ज़मीन, पानी और वायु के लिए खतरनाक हैं। ज़मीन पर लम्बे समय तक पड़े रहने वाले इस कचरे से तरल पदार्थ निकलते हैं इन तरल पदार्थों में कई हानिकारक कैमिकल्स और हैवी मेटल होते हैं। धीरे धीरे ये ज़मीन के अंदर लीच कर जाते हैं ज़मीन और सतह के पानी को दूषित करते हैं। इससे न सिर्फ़ पानी प्रदूषित होता है बल्कि मिट्टी की उर्वरक शक्ति भी ख़त्म होती है। कचरे के लैंडफिल पर सड़ने से विशेषकर जैविक कूड़े के तो उसमें अवायवीय अपघटन (Anaerobic digestion ) शुरू हो जाता है जिससे मीथेन और कार्बन डाइऑक्साइड जैसी गैसें निकलती हैं जो कि ग्रीनहाउस गैसें हैं।

टेरी के एनवायरनमेंट एन्ड वेस्ट मैनेजमेंट डिवीज़न के निदेशक डॉ. सुनील पांडेय कहते हैं कि अनुचित अपशिष्ट प्रबंधन से निकलने वाली ग्रीनहाउस गैसों में मीथेन और ब्लैक कार्बन शामिल हैं। अगर मीथेन की बात की जाए तो यह कार्बन डाइऑक्साइड से 21 गुना शक्तिशाली है। जमा हो रहे कचरे को खुले में जलाने से ब्लैक कार्बन उत्सर्जित होती है और न सिर्फ़ जलाने से बल्कि कचरे के निपटान के लिए इस्तेमाल होने वाली गाड़ियों के डीज़ल से भी ब्लैक कार्बन निकलती है। इन ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन से पृथ्वी का तापमान बढ़ रहा है। अगर इसी तरह तापमान बढ़ता रहा तो हमारे ग्लेशियर पिघल जाएंगे, समुद्र का जल स्तर बढ़ेगा। इन गैसों के कारण स्थानीय वायु प्रदूषण में भी बढ़ोतरी होती है। GIZ WASTE NAMA परियोजना के तहत टेरी द्वारा की गयी वाराणसी बेसलाइन स्टडी के अनुसार अगर अपशिष्ट प्रबंधन ठीक से न किया गया तो लगभग 1 लाख 30 हज़ार मिलियन टन CO2e ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन लगभग 1 लाख 70 हज़ार मिलियन टन CO2e हो जाएगा। इसलिए वाराणसी में अपशिष्ट क्षेत्र से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने के लिए अपशिष्ट प्रबंधन में तत्काल सुधार की ज़रूरत है।

Banaras story

वाराणसी में बढ़ रहे सॉलिड वेस्ट के प्रबंधन को मज़बूत करने के लिए टेरी (द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टिट्यूट), GIZ के सहयोगी के रूप में एक पायलट प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। इसकी ख़ास बात यह है कि यह संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज (UNFCCC) के WASTE NAMA के तहत शुरू हुआ है। NAMA (Nationally Appropriate Mitigation Actions ) एक ऐसा मैकेनिज्म है, जिसके तहत विकासशील देश ग्रीनहाउस गैस शमन के लिए तकनीकी और वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकते हैं।

यह WASTE NAMA का पायलट प्रोजेक्ट है। पायलट प्रोजेक्ट के तहत बेसलाइन असेसमेंट स्टडी की गयी जिसमें यह जानने की कोशिश की गई कि सॉलिड वेस्ट कितना जमा हो रहा है, उसका निपटारा कैसे किया जा रहा है, उस कचरे से निकलने वाली ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन अगले कुछ सालों में कितना बढ़ जाएगा और इन गैसों को कैसे कम किया जाए। वाराणसी में कचरे की बढ़ती स्थिति को समझने के बाद इनफार्मेशन एजुकेशन एंड कम्युनिकेशन प्लान बनाया गया। इनफार्मेशन एजुकेशन एंड कम्युनिकेशन प्लान एक दृष्टिकोण है, ताकि NAMA परियोजना के संदर्भ में अपशिष्ट प्रबंधक और जनरेटर की भागीदारी को सुनिश्चित किया जा सके।

कूड़े के निपटारे में चुनौतियां

  • गीला और सूखा कूड़ा अलग करना

    टेरी द्वारा 4 वार्डों सुंदरपुर, लालापुरा पुर खुर्द, गाँधी नगर और काजीपुरा खुर्द में किए गए सर्वे में पता लगा कि 76 % लोग कूड़े को सेग्रीगेट नहीं करते और 71 % को यह जानकारी नहीं है कि किस तरह का कूड़ा अलग किया जाता है और 70 % लोग जागरूकता न होने की वजह से कूड़े को सेग्रीगेट नहीं करते।

    किसी भी वेस्ट को हैंडल करने के लिए सबसे ज़रूरी और मुश्किल काम है उसे अलग करना, अगर कचरा एक बार घर पर मिक्स हो जाए तो उसे अलग करना बहुत मुश्किल काम है इसमें आर्थिक दिक्कतें भी आती हैं इसलिए कोशिश ये की जानी चाहिए कि उसे घर पर ही अलग कर दिया जाए और गीला कचरा घरों के स्तर पर होम कम्पोस्टिंग के द्वारा मैनेज हो जाए और जो सूखा कूड़ा है उसमे से रिसाइकल वेस्ट निकाल लिया जाए और उसे रीसाइक्लिंग इंडस्ट्रीज को भेज दिया जाए और जो कूड़ा रिसाइकल और दोबारा इस्तेमाल में नहीं आ सकता, उसे ही डिस्पोज़ल साईट पर लेकर जाए इसमें नगर निगम की पहल और लोगों की भागीदारी बहुत ज़रूरी है।

  • चुनौती है कूड़ा इकठ्ठा करना

    लोगों के घरों से निकलने वाले कचरे का कोई वक़्त नहीं होता। अगर आप उन्हें बता भी दे कि सुबह 10 बजे एक जगह से कूड़ा इकठ्ठा किया जाएगा तो लोग या उनके यहाँ प्राइवेट सर्विस देने वाले वेस्ट कलेक्टर उसके बाद वहां कचरा फेंकने आते हैं जिसकी वजह से आपको वहां पूरा दिन कचरा पड़ा हुआ मिलेगा या फिर लोग खाली पड़े प्लॉट और नदी नालों में कूड़ा फ़ेंक देते हैं। नगर निगम का कलेक्शन मैकेनिज्म मज़बूत नहीं है, कूड़ा लोगों के घर से इकठ्ठा किया जाना चाहिए न कि लोगों को कहना चाहिए कि यहाँ कचरा डालिए और वहां से इकठ्ठा कर लिया जाएगा। घरों से कूड़ा इकठ्ठा करने का मैकेनिज्म हर जगह नहीं है। उसके लिए वाराणसी नगर निगम के वेस्ट मैनेजमेंट विभाग के स्ट्रक्चर को और मज़बूत करने की ज़रूरत है।

  • ट्रीटमेंट

    जो 77 % कचरा जमा हुआ है उसका निपटारा करना भी एक चुनौती ही है। इस कचरे को ट्रीट करने के लिए करसड़ा लैंडफिल में 2016 में के 600TPD क्षमता वाले एक खाद संयंत्र की शुरुआत हुई थी इस सयंत्र ने कुछ समय पहले तक 285 TPD क्षमता पर काम किया लेकिन स्टडी के दौरान पाया गया कि यह लगभग बंद पड़ा है । जैविक अपशिष्ट के निपटान के लिए तीन विकेन्द्रित बायोमेथेनेशन प्लांट्स 2017 में शुरू किए गए जहाँ हर एक प्लांट की क्षमता 10 TPD मिश्रित कचरा और 5 TPD जैविक कचरे को ट्रीट करने की है। इनमे से एक प्लांट अभी नगर निगम को हस्तांतरित नहीं हुआ है क्योंकि इसमें मैनेटेनन्स का काम जारी है यह अभी ऑपरेट नहीं हो रहा और 2 प्लांट्स अपनी क्षमता के अनुसार काम नहीं कर रहे हैं।

Banaras story

आगे क्या रास्ता है?

  • जागरूकता पैदा करना

    टेरी में वेस्ट मैनेजमेंट एरिया के फेलो सौरभ मनुजा कहते हैं कि चूँकि कूड़े को शुरूआती स्तर पर ही अलग न किया जाए तो आगे उसका निपटान करने में दिक्कतें आती हैं। कचरे को शुरूआती स्तर पर अलग करने की प्रैक्टिस अभी लोगों के बीच नहीं है इसलिए उन्हें इसके लिए जागरूक बनाने के लिए डोर टू डोर एक्टिविटीज की जा रही हैं अभी तक लगभग 3500 घरों को इसमें शामिल किया जा चुका है।

    बड़ी मात्रा में कचरा जेनरेट करने वाले जैसे- स्कूल, कॉलेज, रेस्तरां, होटल्स, बैंक्वेट के लिए दो ट्रेनिंग प्रोग्राम किए गए। इसमें ये समझाया गया कि इनहॉउस कम्पोस्टिंग और ऑन साइट कम्पोसिटंग कैसे की जाती है। इनफॉर्मल सेक्टर में शामिल लोग जैसे सड़को से कूड़ा इकठ्ठा करने वालों के लिए भी ट्रेनिंग आयोजित की गयी। इसमें करीब 70 से 80 लोगों को ट्रेनिंग दी गयी। उसके बाद 90 वार्डस के सेनेटरी स्टाफ को भी ट्रेनिंग के ज़रिए वेस्ट सेग्रिगेशन की महत्वता समझाई गयी।

  • तकनीकी सहायता

    सौरभ बताते हैं कि पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत हम एक मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी पायलट के तौर पर लगाने जा रहे हैं इसके लिए टेट्रा पैक से भी सहयोग मिला है। मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी को आप छंटाई केंद्र भी कह सकते हैं। इसमें आर्गेनिक वेस्ट, प्लास्टिक, पेपर, मेटल इत्यादि को अलग कर लिया जाता है। आर्गेनिक वेस्ट को बायोमेथेनेशन प्लांट में गैस बनाने के लिए भेजा जाएगा और बिकने वाले माल को रीसाइक्लिंग के लिए। बचा हुआ सूखा कचरा जिसे रीसायकल नहीं किया जा सकता है उसे पास ही में स्थित सीमेंट प्लांट में भेजा जाएगा। इसका मकसद यह है कि डंपसाईट पर जाने वाले ठोस अपशिष्ट को कम से कम किया जा सके और आने वाले वक़्त में इस मॉडल को दूसरी जगहों पर भी लगाया जा सके। वर्तमान में मौजूद प्लांट्स को उनकी क्षमता पर लाने की कोशिश की जा रही है और बंद पड़े प्लांट्स जैसे करसड़ा कम्पोस्टिंग प्लांट, बायोमेथेनेशन प्लांट्स जो नगर निगम को हस्तांतरित होने वाले हैं उनके लिए हम नगर निगम के साथ मिलकर एक एक्सप्रेशन ऑफ़ इंटरेस्ट तैयार कर रहे हैं ताकि दूसरी पार्टी आकर उसे शुरू करें सके।

  • नगर निगम को सहयोग

    वाराणसी को साफ़ बनाने के लिए जीवीपी मैपिंग (Garbage Vulnerable point mapping) की जा रही है। जीवीपी वे अवैध स्थान हैं जहाँ घरों, बाज़ारों और आस पास के व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से निकलने वाला ठोस कचरा इकठ्ठा होता है। पर्यावरण की रक्षा, मानव स्वास्थ्य में सुधार, स्वच्छता मानकों में सुधार, और ठोस कचरे के प्रबंधन के लिए इन साइटों को खत्म करना ज़रूरी है। इसलिए इन पॉइंट्स की पहचान की जा रही है और इन साइट्स को साफ़ करने में हम नगर निगम को सहयोग दे रहे हैं।

निष्कर्ष

ऐतिहासिक शहर वाराणसी में नगरपालिका सॉलिड वेस्ट के प्रबंधन में सुधार के लिए गीले और सूखे कचरे को अलग करना और खाद / बायोमेथेनेशन द्वारा गीले कचरे का स्थानीय प्रसंस्करण करना चाहिए। यह न केवल निपटान की जगहों तक पहुंचने वाले कचरे को कम करेगा बल्कि अपशिष्ट परिवहन लागत और वर्तमान में अनुचित अपशिष्ट प्रबंधन से उत्सर्जित होने वाली ग्रीनहाउस गैसों को कम करेगा। गीले और सूखे कचरे को अलग करने में लोगों को नगर निगम के साथ मिलकर काम करना होगा। आपसी सहयोग के बिना कचरे की इस समस्या ने निपटना मुश्किल होगा।

Tags
Climate change
Household waste
Municipal solid waste
Solid waste
Solid waste management

Related Content

This block is broken or missing. You may be missing content or you might need to enable the original module.