क्या आप दिल्ली की प्रदूषित और जानलेवा हवा से बच पाएंगे?

06 Nov 2019

दिल्ली एक बार फिर से ज़हरीली हवा की चपेट में हैं। दिल्ली सरकार ने वायु प्रदूषण की इस समस्या से निपटने के लिए एडवाइजरी जारी की है। लेकिन इससे निपटने के लिए आमजन को भी अपनी भूमिका निभानी होगी।

Survive Pollution

दिल्ली-एनसीआर के लोगों को वायु प्रदूषण से कोई राहत नहीं मिली है। राजधानी और आस पास के इलाकों के लोग प्रदूषित हवा के गंभीर स्तर में जी रहे हैं। दिल्ली जैसे धुएं की चादर में ढक गई हो। TERI ने इस क्षेत्र में वायु प्रदूषण के प्रमुख कारकों का अध्ययन करने के लिए एक व्यापक शोध किया है। शहर में लगाए गए सभी मॉनिटरिंग स्टेशनों पर आधारित विश्लेषण के अनुसार, पिछले 15 दिनों में PM2.5 का औसतन स्तर, एक स्थिर वृद्धि को दर्शाता है, इसी वजह से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में बढ़ते जानलेवा प्रदूषण के लिए इसे सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। अगर हम उपलब्ध ब्यौरा देखें तो पिछले कुछ दिनों में वायु प्रदूषण का स्तर सीवियर श्रेणी के रिकॉर्ड को तोड़ते हुए अत्यधिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है, क्यूंकि कुछ स्थानों पर दिन के समय PM2.5 की मात्रा 1000 माइक्रोग्राम / m3 देखी गई है और ये आपातकालीन स्थितियों की ओर इशारा करते हैं। PM2.5 का सामान्य स्तर 60 माइक्रो ग्राम क्यूबिक मीटर होना चाहिए। PM2.5 का लेवल बढ़ना यानी वायु प्रदूषण का बढ़ना।

हालाँकि हवा में प्रदूषण का स्तर आने वाले हफ़्तों में निचे आ जाएगा लेकिन जिस ज़हरीली हवा को हम सांस के ज़रिये अंदर ले जा रहे उसका सेहत पर दीर्घकालिक असर होगा जैसे दूषित वातावरण में रहने वाले बच्चों के फेंफड़े सिकुड़ जाते हैं और अधिक उम्र में पहुंचने पर इन्हे सांस संबंधी रोगों का खतरा हो सकता है। गर्भवती महिलाओं, बच्चों और दिल एवं अस्थमा के मरीज़ वायु प्रदूषण के लिहाज़ से ज़्यादा संवेदनशील होते हैं। वायु प्रदूषण से हमें अंदरूनी बिमारी तो ही सकती है जैसे-अनियमित दिल की धड़कन, गंभीर श्वसन रोग साथ ही यह हमारे शरीर के बाहरी अंगों पर भी असर डालता है जैसे- आँखों में जलन, खुजली, सूजन।

सवाल ये है कि क्या वायु प्रदूषण के गिरते स्तर के बीच रहते हुए हम खुद को इसके प्रभाव से बचा सकते हैं? तत्काल राहत के लिए दिल्ली सरकार ने प्रदूषण के बढ़ते स्तर के बीच एडवाइजरी जारी की है।

क्या करें?

  • घर में रहें, घर के बाहर निकलने की योजना को फिलहाल टाल दें
  • सांस लेने में दिक्कत, खांसी, सीनें में तकलीफ़, आँखों में जलन हो तो नज़दीकी डॉक्टर से मिले
  • जिन्हें सांस लेने में परेशानी या फिर फेफड़े से जुडी बीमारी हो वे अपनी दवाई साथ में रखें
  • घर से बाहर निकलते समय N 95 मास्क लगाएं
  • खूब पानी पिएं और विटामिन C से भरपूर भोजन करें
  • घर के गमलों में पौधे लगाएं जो हवा को साफ़ करने में मदद करते हैं
  • पब्लिक यातायात का इस्तेमाल करें
  • धुएं रहित ईंधन का इस्तेमाल करें

क्या न करें?

  • पत्तियों, लकड़ियों, फसल अवशेष और कूड़े को न जलाएं
  • जहाँ ज़्यादा भीड़ हो और ट्रैफिक वाली जगहों से बचें
  • सुबह और शाम की सैर पर न निकलें
  • सुबह और शाम के समय अपने घर की खिड़किया और दरवाज़े न खोलें
  • सिगरेट, बीड़ी और तम्बाकू जैसे उत्पादों का उपयोग न करें
  • कार, स्कूटर्स और अन्य मोटर वाहनों को न चलाएं

वायु प्रदूषण के कम करने में हम सभी को साथ आना होगा यानी की हम सबकी भागीदारी उतनी ही ज़रूरी है जितने सरकार के प्रयास। इस दिशा में हम कुछ ऐसे कदम उठा सकते हैं जिसके दूरगामी परिणाम हो।

  • क्या आपने कभी अपने घर की ख़ूबसूरती बढ़ाने के लिए पेड़ पौधे लगाए? पहले हम अपने घर के सामने पेड़ पौधे लगाया करते थे लेकिन अब एक्सटेंशन के लिए पहले से खिल रही हरियाली को भी उखाड़ फेंकते हैं। हमें अंदाज़ा भी नहीं होता कि ऐसा करके हम अपना ही नुक्सान कर रहे हैं। इसलिए अपनी हवा को स्वच्छ रखने के लिए ज़्यादा से ज़्यादा पौधे लगाएं और उनकी देख भाल करें। पेड़ व पौधे वातावरण में फैलने वाले प्रदूषण को न सिर्फ रोकने में ही सहायक होते बल्कि इनके पत्ते प्रदूषण को अवशोषित करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। ऐसे कई पौधे हैं जो घरों में गमलों में रहकर भी वातावरण के प्रदूषण को अपने अंदर अवशोषित कर ऑक्सीजन में बदल देते हैं जैसे- मनी प्लांट, एलो वेरा, तुलसी, लिली।
  • आपने अपने आस पास लोगों को कूड़ा जलाते हुए देखा होगा लेकिन शायद ही आपने कभी इसके ख़िलाफ़ कुछ कहा हो अगर आपके आस पास कोई ऐसा करें तो उसे रोकें। यह कूड़ा हमारे ही घरों से निकलता है इसे डस्टबिन में डालने की बजाय हम इसे जला देते हैं। ऐसा करके हम उससे तुरंत छुटकारा तो पा लेते हैं लेकिन अपनी हवा को किस तरह प्रदूषित कर रहे हैं इसका अंदाज़ा नहीं लगा पाते। इसलिए आप अपने घर से निलकने वाले कूड़े को जलाने की बजाय उसे कूड़ेदान में डालें।
  • घरेलु बिजली के उपकरणों के इस्तेमाल में न होने पर उनकी पावर सप्लाई बंद कर दें। अक्सर घर के एक कमरे से दूसरे कमरे में या फिर घर से बाहर जाते समय हम बिजली के उपकरण की पावर सप्लाई बंद नहीं करते। क्या आप जानते हैं घर में मौजूद बिजली से चलने वाले उपकरणों से हानिकारक गैस निकलती हैं जो हमारे स्वास्थ्य और वातावरण पर बुरा असर डालती हैं यानी कि प्रदूषण के खिलाफ उठाये जा रहे प्रयासों में आपका ये प्रयास एक महत्वपूर्ण योगदान निभा सकता है।
  • क्या आप पर्यावरण के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी को निभाते हैं? तो क्यों न आप अपने आस पास के लोगों को भी बढ़ते प्रदूषण के खतरों के प्रति सचेत करें। उन्हें बताएं कि क्या करें और क्या न करें। वर्तमान समय में प्रदूषण हमारे लिए एक बड़ी चुनौती है। यदि हम प्रदूषित वातावरण में जीते रहे तो आर्थिक उन्नति का कोई महत्व नहीं रह जाएगा। साथ ही हमें लोगों को जागरूक करने के लिए एक अभियान के तहत काम करना होगा ताकि हमारे पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाया जा सके।
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