समुद्र में फैले प्लास्टिक प्रदूषण के खिलाफ एक पहल ''Rethink Plastic''

27 Jan 2020

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-केंद्रीय मत्स्य शिक्षा संस्थान (सीआईएफई), वर्सोवा के एक अध्ययन के अनुसार मुंबई के मछुवारे जब मछली पकड़ते हैं तो 17 किलोग्राम मछली के साथ 1 किलोग्राम प्लास्टिक भी साथ में आता है। ये वो प्लास्टिक है जो नदी, नालों और लोगों की लापरवाही की वजह से समुद्र में पहुँच रहा है।

Beach plastic waste

समुद्रों में प्लास्टिक की मात्रा बढ़ रही है अगर यह इसी तरह बढ़ता रहा तो आने वाले समय में समुद्रों में मछलियों से ज़्यादा प्लास्टिक कचरा होगा। ये समुद्र जलीय जीवों और पौधों के घर हैं लेकिन प्लास्टिक इन सबके लिए ज़हर साबित हो रहा है। समुद्री जीव जैसे व्हेल, मछलियाँ और कछुए प्लास्टिक के कचरे को अपना शिकार समझकर खा लेते हैं पेट में प्लास्टिक भरे होने की वजह से वे अंदरूनी चोटों का शिकार होते हैं और उनके तैरने की क्षमता भी कम हो जाती है। प्लास्टिक एक ऐसी चीज़ है जो ख़त्म नहीं होती, प्लास्टिक का कचरा छोटे छोटे हिस्सों में टूट जाता है जो माइक्रोप्लास्टिक कहलाता है और यह इतना महीन होता है कि हम इसे देख भी नहीं पाते। यह माइक्रोप्लास्टिक जलीय जीवों के अंदर जाता है और फिर जलीय जीवों के ज़रिए यह हमारी फूड चैन का हिस्सा भी बन जाता है।

प्लास्टिक की इस समस्या से निपटने के लिए टेरी मुंबई में "Rethink Plastic" नाम से एक अभियान चलाएगा, जिसमें प्लास्टिक प्रदूषण, इसके प्रभावों और प्लास्टिक प्रदूषण के प्रबंधन के तरीकों के बारे में जागरूकता बढ़ाने और नागरिकों को सिंगल-यूज़ प्लास्टिक के इस्तेमाल को कम करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। इसके तहत इकठ्ठा की गयी 50,000 प्लास्टिक की बोतलों में देशी पौधें लगाए जाएंगे। यह अभियान "Promotion of countermeasures against marine plastic litter in Southeast Asia and India" परियोजना का हिस्सा है।

4 मार्च 2019 को, जापान सरकार और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) ने दक्षिण-पूर्व एशिया और भारत में समुद्री प्लास्टिक कूड़े के ख़िलाफ़ ज्ञान और जानकारी बढ़ाने के लिए एक सहयोगी प्रयास विकसित करने की घोषणा की। यूनेप (UNEP) द्वारा समर्थित, इस परियोजना का नाम 'Promotion of countermeasures against marine plastic litter in Southeast Asia and India' है। इसे हरिद्वार / ऋषिकेश और इलाहाबाद में गंगा नदी बेसिन और आगरा में यमुना नदी के किनारे कार्यान्वित किया जा रहा है।

मुंबई में 'Rethink Plastic' के लिए आउटरीच गतिविधियां टेरी के पश्चिमी क्षेत्रीय केंद्र (WRC) द्वारा यूनिवर्सिटी ऑफ़ मुंबई और वीरमाता जीजाबाई टेक्नोलॉजिकल इंस्टिट्यूट के सहयोग से लागू की जा रही हैं।

टेरी द्वारा करवाई जाने वाली गतिविधियां:

  • समुद्री वातावरण में प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने के लिए स्थानीय भागीदारी को प्रोत्साहित करना,
  • स्थानीय समुदायों को एक 'स्टेकहोल्डर परसेप्शन सर्वे' के माध्यम से जोड़ना और आगे दिशानिर्देश तय करना
  • प्लास्टिक के खिलाफ निश्चित कार्रवाई करने के लिए कई हितधारकों जैसे कि शिक्षा, उद्योग, सरकार, नागरिक समाज संगठनों और नागरिकों से जुड़ना।
  • दीर्घकालिक परिणाम प्राप्त करने और लोगों तक पहुँच बढ़ाने के लिए प्रशिक्षकों की एक टीम तैयार करना
  • प्लास्टिक कचरे जैसे पेट बोतलों के पुन: उपयोग के नए तरीके का प्रदर्शन कर इन बोतलों में 50,000 देशी पौधें लगाने के लिए लोगों को प्रेरित करना ताकि प्लास्टिक की इन बोतलों में शामिल कार्बन फुटप्रिंट को कम किया जा सके

प्लास्टिक की खपत, अपशिष्ट प्रबंधन और इसके प्रभावों के बारे में एक धारणा सर्वेक्षण।
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2 नवंबर और 3 दिसंबर को टेरी द्वारा नवी मुंबई में वाशी क्रीक, सागर विहार और मिनी शीशोर से सटे दो मैन्ग्रोव क्षेत्रों, बांद्रा के चिम्बई बीच पर सफाई गतिविधियां की गई। टेरी के कर्मचारियों, स्थानीय निवासियों, स्कूली छात्रों और स्थानीय वॉलंटियर्स ने सफाई गतिविधियों में हिस्सा लिया। टेरी टीम ने प्रतिभागियों को क्लीन-अप ड्राइव के बारे में बताया और व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण भी बाटें। 2 नवंबर को हुई सफाई गतिविधि में दो साइटों से कुल 280 किलोग्राम कचरे को इकट्ठा किया गया और 10 श्रेणियों में अलग किया गया जैसे कांच, कागज, प्लास्टिक की बोतलें, रबड़, आदि। 3 दिसंबर को हुई क्लीन-अप ड्राइव में कचरा इकठ्ठा करने के बाद, 16 प्रकार के प्लास्टिक कचरे को अलग किया गया जैसे कि सिंगल यूज़ प्लास्टिक, प्लास्टिक की बोतलें, पॉलिएस्टर और कटलरी।

इस अभियान के तहत टेरी द्वारा स्कूलों, कॉलेजों के वॉलंटियर्स और आवास समुदायों के सहयोग से, शहर के आसपास से इकठ्ठा की गयी अपशिष्ट प्लास्टिक की बोतलों के दोबारा उपयोग को 'रीथिंक प्लास्टिक' के तहत प्रदर्शित किया जाएगा। प्लास्टिक की इन बोतलों में देशी पौधे लगाकर गमले बनाए जाएंगे। देशी पेड़ों जैसे नीम, पीपल, बरगद वगैरह के ये पौधे स्कूल / कॉलेजों / आवासीय सोसाइटियों के परिसरों और सड़क किनारों से इकट्ठे किए जाएंगे। यह अभियान 1 फरवरी, 2020 को विश्व आर्द्रभूमि (वेटलैंड्स) दिवस कार्यक्रम के साथ समाप्त होगा, जहां पौधारोपित 50,000 प्लास्टिक की बोतलों के साथ उन्हें आगे के सरकारी विभागों, गैर सरकारी संगठनों, नागरिक समूहों को वनीकरण के लिए सौंप दिया जाएगा।

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समुद्र में पहुँच रहे प्लास्टिक की मात्रा को कम करने में हम सबकी एक भूमिका है। तो क्यों न कुछ कदम उठाकर प्लास्टिक प्रदूषण को मिलकर कम किया जाए

  • सिंगल यूज़ प्लास्टिक जैसे पानी की बोतलें, कप, बर्तन और किसी भी अन्य प्लास्टिक का इस्तेमाल कम कर दें या मुमकिन हो तो उसका इस्तेमाल बंद कर दें।
  • अगर आपके आस पास कोई रिसाइकल सेंटर है तो अपने प्लास्टिक को रिसाइकल सेंटर को सौंप दें
  • अपने स्थानीय समुद्र तट से प्लास्टिक कचरा हटाने के लिए क्लीन-अप ड्राइव का हिस्सा बने और अपने दोस्तों, परिवार के लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करें
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